नया मेला
Monday, 24 April 2017
शायरी
आज कोई लफज ही नहीं निकल रहे,
खामोशी इस कदर छाई है।
आप सबको रुबरु देखकर तसल्ली है,
कारवां के साथ हूं।
--राहुल
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