मय शरीफ हो गई
मय भी अब शरीफ़ हो गई,
दिल के और करीब हो गई।
सुना है ये मुल्क बचाने की,
अब नई तरकीब हो गई ।
मय भी अब.....
कहते हैं डूब रहे बाजारों की,
फिर से नई आमदनी हो गई।
मय भी अब....
ये तो हुक्मरानों के साख की,
असल में नई तक़दीर हो गई।
मय भी अब शरीफ़ हो गई
दिल के और करीब हो गई ।
By- राहुल
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